वर्तमान काल के 24 तीर्थंकर के नाम, प्रतीक, वर्ण एवं निर्वाण स्थानवर्तमान काल के 24 तीर्थंकर के नाम, प्रतीक, वर्ण एवं निर्वाण स्थान

नाम प्रतीक वर्ण निर्वाण स्थान 1. ऋषभदेवजी बैल सुवर्ण अष्टापद पर्वत (कैलाश) 2.अजितनाथजी हाथी सुवर्ण सम्मेत शिखर 3. संभवनाथजी घोड़ा{...}

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स्थापनाचार्यजी के प्रतिलेखन के 13 बोलस्थापनाचार्यजी के प्रतिलेखन के 13 बोल

(१) शुद्धस्वरूप के धारक गुरु(२) ज्ञानमय(३) दर्शनमय(४) चारित्रमय(५)शुद्ध श्रद्धामय(६)शुद्ध प्ररूपणामय(७) शुद्ध स्पर्शनामय(८-९-१०) पंचाचार का पालन करे, करावे व अनुमोदन करे(११){...}

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धारणा अभिग्रह पच्चक्खाणधारणा अभिग्रह पच्चक्खाण

धारणा अभिग्गहं पच्चक् खाइ (पच्चक् खामि); अन्नत्थणाभोगेणं, सहसागारेणं, महत्तरागारेणं, सव्वसमाहि-वत्तियागारेणं वोसिरई (वोसिरामि).{...}

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दुविहार पच्चक्खाणदुविहार पच्चक्खाण

दिवसचरिमं पच्चक् खाइ (पच्चक् खामि); दुविहं पि आहारं, असणं, खाइमं, साइमं, अन्नत्थणाभोगेणं, सहसागारेणं, महत्तरागारेणं, सव्वसमाहि-वत्तियागारेणं वोसिरई (वोसिरामि).{...}

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तिविहार पच्चक्खाणतिविहार पच्चक्खाण

दिवसचरिमं पच्चक् खाइ (पच्चक् खामि); तिविहं पि आहारं, असणं, खाइमं, साइमं, अन्नत्थणाभोगेणं, सहसागारेणं, महत्तरागारेणं, सव्वसमाहि-वत्तियागारेणं वोसिरई (वोसिरामि).{...}

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चउविहार पच्चक्खाणचउविहार पच्चक्खाण

दिवसचरिमं पच्चक् खाइ (पच्चक् खामि); चउव्विहं पि आहारं, असणं, पाणं, खाइमं, साइमं, अन्नत्थणाभोगेणं, सहसागारेणं, महत्तरागारेणं, सव्वसमाहि-वत्तियागारेणं वोसिरई (वोसिरामि).{...}

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पाणहार पच्चक्खाणपाणहार पच्चक्खाण

पाणहार दिवसचरिमं पच्चक् खाइ (पच्चक् खामि); अन्नत्थणाभोगेणं, सहसागारेणं, महत्तरागारेणं, सव्वसमाहि-वत्तियागारेणं वोसिरई (वोसिरामि).{...}

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तिविहार उपवास​ पच्चक्खाणतिविहार उपवास​ पच्चक्खाण

सूरे उग्गए अब्भत्तट्ठं पच्चक् खाइ (पच्चक् खामि); तिविहं पि आहारं, असणं, खाइमं, साइमं, अन्नत्थणाभोगेणं, सहसागारेणं, पारिट्ठावणियागारेणं, महत्तरागारेणं, सव्वसमाहि-वत्तियागारेणं; पाणहार पोरिसि,{...}

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चउविहार उपवास​ पच्चक्खाणचउविहार उपवास​ पच्चक्खाण

सूरे उग्गए अब्भत्तट्ठं पच्चक् खाइ (पच्चक् खामि); चउव्विहं पि आहारं, असणं, पाणं, खाइमं, साइमं, अन्नत्थणाभोगेणं, सहसागारेणं, पारिट्ठावणियागारेणं, महत्तरागारेणं, सव्वसमाहि-वत्तियागारेणं, वोसिरई{...}

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